आश्चर्य से भरपूर फ़िल्म Wonder न सिर्फ आपको चकित करेगी बल्कि संघर्षों को स्वीकारने की हिम्मत भी देगी

यह विचार हमारे मन में हमेशा मौजूद रहे तो दुनिया एक नए सिरे से खूबसूरत होती जाती है. खैर, वीकेंड वॉच में केवल नई फ़िल्मों के लिए जगह बनाई जाए यह जरूरी तो नहीं है. एक फ़लक परिवार के बड़ों का हो तो कुछ बड़े होते बच्चों की दुनिया के लिए भी तो होनी हीं चाहिए. इस दौड़ती – भागती दुनिया में बस हम आगे चलते जाते हैं, मुड़कर नहीं देख पातें कि कुछ रह गया जो हमारे लिए कितना अनमोल रहा था. फ़िल्मों की आवाजाही में कुछ ढूंढते हुए अनायास कई आश्चर्यों में मन डूब जाता है और लगता है कि उन क्षणों में क्षणिक हीं सही, पर जी लिया जाए. ऐसे में हीं एक पारिवारिक फ़िल्म सामने खड़ी हो जाती है जो मन की उलझनों को तीतर – बितर कर एक राह सुझाती है.

2017 में रिलीज़ हुई फ़िल्म “Wonder” उन लाखों – करोड़ों आँखों से देखी – अनदेखी संभावनाओं की दुनिया है जहाँ जिंदगी अलग – अलग रंगों से जूझना और सच को स्वीकार करने की हिम्मत देती है. फिल्म की बुनावट हमारे आस – पास के चरित्रों जैसी भी है तो कभी हमें बहुत अनजाने चरित्रों की ओर भी ले जाती है. फ़िल्म Wonder कौतूहल की सीढ़ियों से होती हुई संघर्षों को स्वीकारते हुए जीवन जीने की कला सिखाती है.

R. J Palacio की बेस्ट सेलर किताब आधारित है फ़िल्म Wonder 

R. J Palacio की बेस्ट सेलर किताब “Wonder ” पर आधारित यह फ़िल्म एक ऐसे बच्चे की कहानी है जो Treachers collins syndrome से ग्रस्त है. यह एक आनुवांशिक रोग है जिसमें चेहरे पर विकृतियाँ उभर आती हैं.असल में यह फ़िल्म मनोवैज्ञानिक थ्रिलर से ज्यादा हास्यास्पद रूप से दर्शकों को खींचती है.

फ़िल्म Wonder  की पटकथा 

Wonder की कहानी Auggie( Jacob Tremblay) एक 11 साल के बच्चे की कहानी है जिसे होमस्कूलिंग के बाद मिडिल स्कूल के लिए तैयार किया जा रहा. यहाँ Julia Roberts माँ के किरदार में खुद के जुझारूपन को साबित करती हैं और Auggie को बाहर की दुनिया से रूबरू करने के लिए पुरज़ोर कोशिश करती हैं.

कहानी स्कूली बच्चों के ईर्द-गिर्द घूमती है. Auggie उपहास ,हंसी और उपेक्षा से विचलित होता जाता है. चेहरे की विकृतियों के साथ दुनिया में आए Auggie दूसरों से अलग दिखता है. सामान्य जीवन जीने के लिए लगभग 27 सर्जरी की गईं फिर भी वह अपनी विवशता से बाहर नहीं आ पाता. बचपन से समाज में खुद के लिए जगह बनाने के लिए वह अंतरिक्ष यात्री की तरह हेलमेट पहनना पसंद करता है. पर स्कूल में यह करना मुमकिन नहीं. फिर भी वह अन्य बच्चों संग घुलना – मिलना चाहता तो है पर चेहरे की असामान्यताओं से विफल होता है. धीरे – धीरे Jack नाम के लड़के से उसकी दोस्ती होती है और इस क्रम में वह बहुत कुछ सीखता- सिखाता है. यूँ तो कहानी में परिवार में जो भी चरित्र हैं वो हमेशा Auggie से संवाद करते हैं और उसे प्यार करते हैं. उसे हमेशा मजबूत रहना सिखाते हैं. पिता(Owen Willson) और बहन ( Olivia) उसके प्रति संवेदनशील हैं.

कहानी ईमानदारी से आगे बढ़ती है. यथार्थ में ऐसी समस्याओं के समाधान के तरीके सिखाती है. और ये मनोरंजक और पारिवारिक होते हुए ये कहती है कि आत्मविश्वास धीरे –  धीरे हीं सही लेकिन उगते हुए सूरज की किरणों की तरह कण- कण में छा जाता है.

अनवरत चलने वाली फ़िल्म है Wonder, फ़िल्म के लिए Stephen Chbosky को किया जाएगा याद

Stephen Chbosky जो सह- लेखक और निर्देशक हैं इस फ़िल्म के,उन्हें ऐसी फ़िल्म के लिए हमेशा याद किया जाए. वक्त निकाल कर देखी जाए यह जो हमें भीतर – भीतर भी Wonder से चकाचौंध कर देती है.जिंदगी से कैसे सीखना है और संघर्ष करने की बुनियादी बातों को हम भी देख सकें.यह फ़िल्म अनवरत चलती जाती है, चकित करती जाती है और हम ठहर नहीं पातेपाते, और अनायास चाहते रहतें भी हैं कि किसी की दुनिया में भी रौशनी छाई रहे. हम दुनिया के आश्चर्य से बाहर नहीं निकलना चाहतें और चाहते भी हैं कि ऐसी दुनिया में कोई खुद के लिए नया आकाश ढ़ूंढ़ ले.

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